एक अजीब सी कैफियत है मेरी तेरे बिन, रह भी लेता हु, और रहा भी नही जाता..! खूबसूरत था इस कदर कि महसूस ना हुआ… , कैसे, कहाँ और कब मेरा बचपन चला गया.. जो तुम्हें हमारे और भी क़रीब लाती है.. मुहब्बत है हमें ऐसी शिकायतों से,.,!! मैं भी ठहरूँ किसी के होंठों पे काश कोई मेरे लिए भी दुआ करे,.,!! सारा बदन अजीब से खुशबु से भर गया शायद तेरा ख्याल हदों से गुजर गया.,.!! बाज़ार के रंगों से रंगने की मुझे जरुरत नही, किसी की याद आते ही ये चेहरा गुलाबी हो जाता है.,.!! धडकनों को कुछ तो काबू में कर ऐ दिल, अभी तो पलके झुकाई है, मुस्कुराना बाकी है उनका,.,!! बहुत कमिया निकालने लगे हैं हम दूसरों में … आओ एक मुलाक़ात ज़रा आईने से भी कर लें…!! बेच डाला है दिन का हर लम्हा रात थोड़ी बहुत हमारी है,.,!! नए किरदार आते जा रहे हैं मगर नाटक पुराना चल रहा है,.!! दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी,.,!! नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँढिए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई,.,!! दर्द ही तो था थोड़ा लिख लिया, थोड़ा कह लिया, तो कभी थोड़ा सह लिया,.,!! सुलझे-सुलझे बालों वाली लड़की से कोई पू...