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रास्ता मैं बतलाता हूँ - Hindi Poem By Ashish Awasthi

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राहों के पत्थर देखे इतने के अब नहीं संभल पाता हूँ अपने पीछे चलते चलते खुद से दूर निकल जाता हूँ अब तो कोई रोक लो आके मैं लीक तोड़ कर जाता हूँ फिर न कहना, के कहा नहीं ? सब पहले से बतलाता हूँ झूमो तुम सब मैखाने जाकर आओ ,रास्ता मैं बतलाता हूँ।।

मजदूर नहीं तो कुछ नहीं (Majdoor Diwas Par Vishesh) - Hindi Poem By Ashish Awasthi

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मजदूर नहीं तो हम नहीं, आप नहीं पुल नहीं,सड़क नहीं कारखानों  में भाप नहीं घर नहीं, नगर नहीं विकास का कोई माप नहीं मज़बूरी नहीं,लाचारी नहीं गरीबी का  ये सांप नहीं मेहनत नहीं, मजदूरी नहीं आराम का हिसाब नहीं कारखाने नहीं, उद्योग नहीं पेट की ऐसी  आग नहीं कपडे नहीं, खाना नहीं रहने को निवास नहीं कुएं नहीं , नहर नहीं बुझती कभी प्यास नहीं मजदूर नहीं तो कुछ नहीं हम नहीं , आप नहीं | |

Hindi SMS, Royal (Nawabi) Urdu Sher, 2 Liners, Shayri, Kavita, Ghazal, Shayri Collection in Hindi Font Part-40

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घर की वहशत से लरज़ता हूँ मगर जाने क्यूँ शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है,.,!! Ghar ki vashat se larjata hu magar jane kyun Sham hoti hai to Ghar jane ko jee chahta hai झूटी उम्मीद की उँगली को पकड़ना छोड़ो दर्द से बात करो दर्द से लड़ना छोड़ो,.,!! Jhoothi ummeed ki ungali ko pakdana chhodo Dard se bat kro dard se ladna chhodo सारी दुनिया से लड़े जिसके लिए एक दिन उससे भी झगड़ा कर लिया,.,!! Saari duniya se lade jiske liye Ek din usse bhi jhagda kr liya हम कुछ ऐसे तिरे दीदार में खो जाते हैं जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं,.,!! Ham kuchh aise tere deedar me kho jate hain Jaise bachhe bhare bazar me kho jate hain इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद,.,!! Insan ki khwaishon ki koi inteha nhin Do gaj jameen bhi chahiye do gaj kafan ke baad लोग कहते हैं कि बदनामी से बचना चाहिए कह दो बे इस के जवानी का मज़ा मिलता नहीं,.,!! Log kahte hain ke badnaami se bachna chahiye Kah do be iske jawani ka maja milta nhi रोज़ सोचा है भूल जाऊँ तुझे रोज़ ये बात...

Hindi SMS, Royal (Nawabi) Urdu Sher, 2 Liners, Shayri, Kavita, Ghazal, Shayri Collection in Hindi Font Part-39

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सलीक़े से हवाओं में वो खुश्बू घोल सकते हैं, अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं.,.!! एक दूकान के आगे लिखा था की उधार एक जादू है, हम देंगे और आप गायब हो जाओगे......।। अकेले ही काटना है मुझे जिंदगी का सफर पल दो पल साथ रहकर मेरी आदत ना खराब करते..!! दिल की नाज़ुक रगें टूटती हैं याद इतना भी कोई न आए,.,!! सबको हम भूल गए जोश-ए-जुनूँ में लेकिन इक तेरी याद थी ऐसी जो भुलाई न गई,.,!! किसे ख़बर थी न जाएगी दिल की वीरानी मैं आईनों में बहुत सज-सजा के बैठ गया,.,!! हमें माशूक़ को अपना बनाना तक नहीं आता बनाने वाले आईना बना लेते हैं पत्थर से,.,!! ज़िन्दगी हो तो कई काम निकल आते है याद आऊँगा कभी मैं भी ज़रूरत में उसे,.,!! इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं,.,!! छत की कड़ियों से उतरते हैं मेरे ख़्वाब मगर मेरी दीवारों से टकरा के बिखर जाते हैं,.,!! मैं सच कहूंगी मगर फ़िर भी हार जाऊँगी वो झूठ बोलेगा और लाजवाब कर देगा.,.,!! रूठ कर आँख के अंदर से निकल जाते हैं अश्क बच्चों की तरह घर से निकल जाते हैं,.,!! गुनाह गिन के मैं क्यूँ अपने दिल को छोटा करूँ सुना है तेरे क...

Hindi SMS, Royal (Nawabi) Urdu Sher, 2 Liners, Shayri, Kavita, Ghazal, Shayri Collection in Hindi Font Part-38

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एक अजीब सी कैफियत है मेरी तेरे बिन, रह भी लेता हु, और रहा भी नही जाता..! खूबसूरत था इस कदर कि महसूस ना हुआ… , कैसे, कहाँ और कब मेरा बचपन चला गया.. जो तुम्हें हमारे और भी क़रीब लाती है.. मुहब्बत है हमें ऐसी शिकायतों से,.,!! मैं भी ठहरूँ किसी के होंठों पे काश कोई मेरे लिए भी दुआ करे,.,!! सारा बदन अजीब से खुशबु से भर गया शायद तेरा ख्याल हदों से गुजर गया.,.!! बाज़ार के रंगों से रंगने की मुझे जरुरत नही, किसी की याद आते ही ये चेहरा गुलाबी हो जाता है.,.!! धडकनों को कुछ तो काबू में कर ऐ दिल, अभी तो पलके झुकाई है, मुस्कुराना बाकी है उनका,.,!! बहुत कमिया निकालने लगे हैं हम दूसरों में … आओ एक मुलाक़ात ज़रा आईने से भी कर लें…!! बेच डाला है दिन का हर लम्हा रात थोड़ी बहुत हमारी है,.,!! नए किरदार आते जा रहे हैं मगर नाटक पुराना चल रहा है,.!! दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी,.,!! नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँढिए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई,.,!! दर्द ही तो था थोड़ा लिख लिया, थोड़ा कह लिया, तो कभी थोड़ा सह लिया,.,!! सुलझे-सुलझे बालों वाली लड़की से कोई पू...

Hindi SMS, Royal (Nawabi) Urdu Sher, 2 Liners, Shayri, Kavita, Ghazal, Shayri Collection in Hindi Font Part-37

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यादो की शाल ओढकर वो आवारा गरदियाँ कुछ यूँ भी गुजारी है हमने दिसम्बर की सर्दियाँ.,.!! आज फिर वो ख़फ़ा है.. खैर...कौन सा ये पहली दफा है.,.!! अरे बददुआये … किसी ओर के लिए रख, मोहब्बत का मरीज हूँ, खुद ब खुद मर जाऊँगा…!! रजाईयां नहीं हैं....उनके नसीब में... गरीब गर्म हौंसले ओढ़कर सो जाते हैं..!! रात भर महका कमर मेरा मोगरे की ख़ुश्बू से बहुत दिनों बाद मेरे ख्वाबों में तुम आये थे...!! ए दिसंबर तू भी मेरे जैसा ही है, आख़िरी में आता है सबको ख़याल तेरा,.,!! कौन कहता है वक़्त मरता नहीं हमने सालों को ख़त्म होते देखा दिसंबर में,.,!! याद-ए-यार का मौसम और सर्द हवाओं का आलम ऐ दिल जरा सम्हल के दिसंबर जा रहा है,.,!! ऐ दिल! चुप हो जा बस बहस ना कर उसके बिना साल गुजर गया "दिसंबर और गुजर जाने दे,.,!! काश के कोई मेरा अपना सम्भाल ले मुझको, बहुत थोड़ा रह गया हूँ में भी दिसंबर की तरह,.,!! एक और ईंट गिर गई दीवार-ए-जिंदगी से: नादान कह रहे हैं, नया साल मुबारक हो.,.!! तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया,.,!! वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर, आदत इसकी भी आदमी सी है..!! ये साल ...

Hindi SMS, Royal (Nawabi) Urdu Sher, 2 Liners, Shayri, Kavita, Ghazal, Shayri Collection in Hindi Font Part-36

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वो बस जाती है फकीरी में अक्सर , तहजीब दौलत की मोहताज नहीं होती,.,!! मुक़द्दर में लिखा कर लाएँ हैं हम दर-बदर फिरना परिंदे कोई मौसम हो परेशानी में रहते हैं,.,!! उनकी एक झलक पे ठहर जाती है नज़र....खुदाया कोई हमसे पुछे...दीवानगी क्या होती है ,.,!!! हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता,.,!! उसका काला टीका किसी सुदर्शन चक्र से कम नहीं.. माँ एक उंगली काजल से सारी बलायें टाल देती है..!! अजीब ज़माना आया हैं वो शख्स खफा सा लगता हैं , मैं दिल तो दे दूँ उस को मगर वो बेवफा सा लगता हैं .,.,!! जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का इक जैसा नुक़सान हुआ,.,!!! अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले,.,!!! ऐ बेख़ुदी ठहर कि बहुत दिन गुज़र गए मुझको ख़याल-ए-यार कहीं ढूँडता न हो,.,!! फुर्सत मिले अगर दूसरो से तो समझना मुझे ज़रूर तुम्हारी उलझनों का मै मुकम्मल इलाज हूँ.,.,!! एक रात आप ने उम्मीद पे क्या रक्खा है आज तक हम ने चराग़ों को जला रक्खा है,.,!! उम्र कैसे कटेगी 'सैफ़' यहाँ रात कटती नज़र नहीं आती,...