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Urdu sher-best indian poets, shayar in Hindi Font

पहली मुलाकात थी और हम दोनों ही थे बस .,., वो जुल्फें न संभाल पाए , और हम खुद को .,.,!!! Pahli mulakat thi aur ham dono hi the bas Wo julfen na sambhal paaye aur ham khud ko ----------------------------------------------------------- वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है, वो कोई गैर नहीं अपना ही रिश्तेदार होता है, किसी से अपने दिल की बात कहना न कभी भूले से, यहाँ ख़त भी जरा सी देर में अख़बार होता है.,.,!!! Wo jiska teer chupke se jigar ke par hota hai Wo koi gaur nahin apna hi rishtedar hota hai Kisi se apne dil ki bat kahna na bhoole se Yahan khat bhi jara si der me akhbar hota hai ---------------------------------------------------------- वो कहते हैं ,हम सूरते ए मुल्क बदलेंगे, बरसो से जिन्होंने अपनी करवट नहीं बदली.,.,!!! Wo kahte hain, ham soorat-e-mulk badle ge Barson se jinhone ne apni karvat nahi badli ------------------------------------------------------- उसने कहा था..... "सुनो कि तबियत ठीक नहीं है , सुनो कि पूछो कैसी हूँ मैं , सुनो कि गुस्सा झूंट-मूट है , सुनो कि पहले जै...

Urdu Sher-O-Shayri Collection

बड़ी मुश्किल से होता है,यह तेरी यादों का कारोबार, मुनाफा कम तो है,लेकिन गुज़रा हो ही जाता है.,.,!!! Badi mushkil se hota hai, yah teri yadon ka karobar Munafa kam to hai, lekin gujara ho hi jata hai ---------------------------------------------------------------------- वो मेरी ग़ज़ल पढ़ कर ... पहेलु बदल के बोले कोई इससे कलम छीने ये किसीकी जान लेलेगा ...!!! Wo meri ghajal padh kar, pahlu badal ke bole Koi isse kalam chheene ye kisi ki jaan le lega -------------------------------------------------------------------- राज किसी का भी हो, किसी से कुछ नहीं कहते, ये एहतियात सिर्फ, अंधेरों में पायी जाती है...,.,!!! Raj kisi ka bhi ho, kisi se kuchh nahi kahte Ye ehtiyaat sirf andheron me paayi jati hai ----------------------------------------------------------------------- मैं जिन को दे कर निवाला गया हूँ ,उनके दर से उछाला गया हूँ , जो घर मैंने बना कर दिया था ,मैं उस घर से निकाला गया हूँ...!! Mai jinko dekar nivala gaya hun unke dar se uchhala gaya hu Jo ghar maine bana kar diya tha main us dar s...

Mehfil- Rahat Indauri ke Sher (Great Collection)

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Rahat Indauri- http://en.wikipedia.org/wiki/Rahat_Indori सफ़र की हद हो,वहां तक ये निशान रहे .,., चले चलो के जहाँ तक ये आसमान रहे .,. ये क्या के उठाये कदम और आ गयी मंजिल .,., मज़ा तो जब है के पैरों में कुछ थकान रहे .,.,!!! Safar ki had ho , wahan tak ye nishan rahe Chale chalo ke jahan tak ye aasmaan rahe Ye kya ke uthaye kadam aur aa gayi manjil Maja to jab hai ke pairon me kuchh thakan rahe ---------------------------------------------------------- आँख में पानी रखो ,होंठो पे चिंगारी रखो ,.,. जिंदा रहना है तो तरकीबे बहोत सारी रखो.,., ले तो आये शायरी ,बाज़ार में राहत मियाँ ,., क्या ज़रूरी है ? लहजे को भी बाजारी रखो .,.,!!! Aankhon me pani rakho, honthon pe chingari rakho Jinda rahna hai to tarkeebe bahot sari rakho Le to aaye shayari , bajar me rahat miyan Kya jaruri hai ? lahje ko bhi bajari rakho ----------------------------------------------------------------- रास्ता भूल गया  क्या इधर आने वाला ,., अब तो ये सुबह का तारा भी है जाने वाला .,., याद के फूल को पलकों पे सजा के रखना ,., ये म...

Best 2 Liner Urdu Sher in Hindi Font

मैं जानता हूँ मेरी खुद्दारियां तुझे खो देंगी लेकिन ,., मैं क्या करूँ ,मुझ को मांगने से नफ़रत है .,.,!!!!! Main Janta hun meri khuddariyan tujhe kho dengi lekin Main kya karu mujhko mangne se nafrat hai ----------------------------------------------------------------- पूछा किसी ने हाल बड़ी मुदत्तों के बाद ,., आया मेरा ख्याल बड़ी मुदत्तों के बाद .,., करता है वो याद मुझे चाहत से मगर .,., होता है ये कमाल बड़ी मुदत्तों के बाद .,.!!! Poochha kisi ne hal badi muddaton ke bad Aaaya mera khayal badi muddaton ke bad Karta hai wo yaad mujhe chahat se magar Hota hai ye kamal badi muddaton ke bad ----------------------------------------------------------------- समझ जाता हूँ लेकिन देर से , मैं दाँव -पेंच उसके ,.,. वो बाज़ी जीत जाता है ,मेरे चालाक होने तक .,.,!! Samajh jata hun lekin der se , main daanv pench uske Wo baji jeet jata hai, Mere chalak hone tak --------------------------------------------------------------- किस्सा -ए-ग़म , दिल-ए-काफ़िर का सुनाते किसको .,., अजनबी शहर का हर शक्श मुसलमान ...

Mehfil-Most popular poetry of Dr. Kumar Vishwas - O Kalpvraksh ki sonjuhi

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ओ कल्पवृक्ष की सोनजुही ! ओ अमलतास की अमलकली! धरती के आतप से जलते.. मन पर छाई निर्मल बदली..! मैं तुमको मधुसदगन्ध युक्त संसार नहीं दे पाऊँगा | तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा || तुम कल्पवृक्ष का फूल और मैं धरती का अदना गायक , तुम जीवन के उपभोग योग्य ,मैं नहीं स्वयं अपने लायक , तुम नहीं अधूरी गजल शुभे ! तुम साम-गान सी पावन हो , हिम शिखरों पर सहसा कौंधी ,बिजुरी सी तुम मनभावन हो, इसलिये , व्यर्थ शब्दों वाला व्यापार नहीं दे पाऊँगा | तुम मुझको करना माफ ,तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा|| तुम जिस शय्या पर शयन करो ,वह क्षीर सिन्धु सी पावन हो , जिस आँगन की हो मौलश्री ,वह आँगन क्या वृन्दावन हो , जिन अधरों का चुम्बन पाओ ,वे अधर नहीं गंगातट हों , जिसकी छाया बन साथ रहो ,वह व्यक्ति नहीं वंशीवट हो , पर मैं वट जैसा सघन छाँह विस्तार नहीं दे पाऊँगा | तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा|| मै तुमको चाँद सितारों का सौंपू उपहार भला कैसे ? मैं यायावर बंजारा साधूँ सुर संसार भला कैसे ? मै जीवन के प्रश्नों से नाता तोड तुम्हारे साथ शुभे ! बारूद बिछी धरती पर कर लूँ दो पल प्यार भ...

Roj taron ki numaish me khalal padta hai - Best Urdu Rahat Indauri

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रोज़ तारों की नुमाइश में खलल पड़ता है ; चाँद पागल है ..अँधेरे में निकल पड़ता है,., एक दीवाना मुसाफिर है मेरी आँखों में ; वक़्त बे -वक़्त .. ठहर जता है ....चल पड़ता है .. अपनी ताबीर के चक्कर में मेरा जगता ख्वाब ; रोज़ सूरज की तरह घर से निकल पड़ता है,., रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं ; रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है . उसकी याद आई है ....साँसों ! ज़रा आहिस्ता चलो ; धडकनों से भी ....इबादत में ..खलल पड़ता है,.,!!! ----------------------------------------------------------------- Roj taron ki numaish me khalal padta hai Chand pagal hai, andhere me nikal padta hai Ek deewana musafir hai meri aankhon me Waqt be-waqt thahar jata hai , chal padta hai Apni tabeer ke chakkar me mera jagta khwab Roj suraj ki tarah ghar se nikal padta hai Roj patthar ki himayat me ghajal likhte hain Roj sheeshon se koi kaam nikal padta hai Uski yaad aayi hai , saanson jara aahista chalo Dhadkanon se bhi ibadat me khalal padta hai

Kumar Vishwas Winter Special- Yaad tak jam ke baith jati hai

Enjoy Winter.....! "धूंप भी खुल के कुछ नहीं कहती , रात ढलती नहीं थम जाती है , सर्द मौसम की एक दिक्कत है , याद तक जम के बैठ जाती है....,.!!!! ---------------------------------------------------- Dhoop bhi khul ke kuchh nahin kahti Raat dhalti nahin tham jaati hai Sard mausham ki ek dikkat hai Yaad tak jam ke baith jati hai